राखीगढ़ी में एएसआई की बड़ी खोज: हड़प्पा काल के 8 कंकाल मिले, साथ में दफ़न थी रिकॉर्ड संख्या में मिट्टी के बर्तन
सिंधु घाटी सभ्यता के सबसे बड़े स्थल पर मिलीं शंख की चूड़ियाँ और सोने के मनके, डीएनए जांच के लिए लखनऊ और कोलकाता भेजे गए सैंपल

हिसार/नई दिल्ली: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने सिंधु घाटी सभ्यता (IVC) के सबसे बड़े ऐतिहासिक स्थल राखीगढ़ी में चल रही खुदाई के दौरान एक और ऐतिहासिक कामयाबी हासिल की है। एएसआई को राखीगढ़ी के ‘माउंड नंबर 7’ (Mound No. 7) पर स्थित मैच्योर हड़प्पा कब्रिस्तान से 8 मानव कंकाल मिले हैं। यह खोज प्राचीन सभ्यता के अंतिम संस्कार और उनकी जीवनशैली को लेकर कई नए राज़ खोल सकती है।

पहली बार मिले रिकॉर्ड 40 मिट्टी के बर्तन (Pottery Offerings)
एएसआई के अधीक्षण पुरातत्वविद् (Superintending Archaeologist) मनोज सक्सेना ने बताया कि इस बार की खुदाई में मिली सबसे हैरान करने वाली बात इन शवों के साथ रखे गए बर्तन हैं।
“कब्रिस्तान में मिले कंकालों के साथ पहली बार करीब 40 मिट्टी के बर्तन (Pottery Offerings) बरामद हुए हैं। इससे पहले राखीगढ़ी में किसी भी शव के साथ मिले बर्तनों की अधिकतम संख्या 27 थी। इसके अलावा, महिला कंकालों के हाथों में शंख की चूड़ियाँ (Shell Bangles) और उनके पास सोने के मनके (Gold Beads) भी पाए गए हैं।”
डीएनए और वैज्ञानिक जांच के लिए भेजे गए सैंपल
खुदाई के दौरान मिले कंकालों में से तीन को व्यापक अध्ययन और विश्लेषण के लिए एंथ्रोपोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (AnSI), कोलकाता भेजा गया है। इनमें से दो कंकाल 40 की उम्र पार कर चुकी महिलाओं के हैं और एक पुरुष का है।

इसके साथ ही, प्राचीन डीएनए (DNA) निकालने और उसकी सटीक जांच के लिए एक कंकाल का सैंपल बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पेलिओसाइंसेज (BSIP), लखनऊ भेजा गया है। अनसी (AnSI) द्वारा अगले दो से तीन महीनों में इसकी विस्तृत रिपोर्ट सौंपने की उम्मीद है। हालांकि, लंबे समय से इस क्षेत्र में हो रही खेती के कारण 3 कंकाल आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त भी पाए गए हैं।

4,000 से 5,000 साल पुराने रहन-सहन की झलक
इस साल 22 फरवरी से शुरू होकर इस महीने की शुरुआत तक चले इस उत्खनन सत्र में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं:
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घरेलू सामग्रियां: कंकालों के अलावा खुदाई में प्राचीन काल के मिट्टी के बर्तन, चूल्हों के अवशेष और रोज़मर्रा के इस्तेमाल की वस्तुएं मिली हैं, जो आज से लगभग 4,000 से 5,000 साल पहले रहने वाले लोगों की जीवनशैली को दर्शाती हैं।
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माउंड नंबर 5 की खुदाई: पहली बार एएसआई ने ‘माउंड नंबर 5’ पर भी खुदाई की। यहाँ आवासीय संरचनाएँ (Residential Structures), मनके और दैनिक उपयोग की वस्तुएँ मिली हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि यह क्षेत्र अपने समय का एक महत्वपूर्ण सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्र रहा होगा।
पिछले दो दशकों में एएसआई और डेक्कन कॉलेज, पुणे के शोधकर्ताओं ने इस पूरे साइट से अब तक लगभग 70 कंकाल बरामद किए हैं। अधिकारियों का मानना है कि राखीगढ़ी की परतों के नीचे अभी भी कई ऐसे रहस्य दफन हैं, जो दुनिया की इस सबसे प्रारंभिक शहरी सभ्यता के इतिहास को और समृद्ध करेंगे।




