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बेंगलुरु का ‘असंभव’ मिशन: मात्र 24 घंटों में पुनर्जीवित हुआ सूख चुका तालाब

गुरुनंदन राव और 'हैंड्सऑन' संस्था की अनूठी पहल से बिक्कनहल्ली कुंटे को मिला नया जीवन, जल संरक्षण का बना मिसाल

ब्यूरो: बेंगलुरु के बिक्कनहल्ली कुंटे (Bikkanahalli Kunte) का तालाब, जिसे कभी मृत मानकर भुला दिया गया था, आज फिर से पानी से लबालब है। इस बदलाव के पीछे ‘हैंड्सऑन’ (HandsOn) संस्था के संस्थापक गुरुनंदन राव और उनकी टीम की कड़ी मेहनत है।

तालाब की दुर्दशा और चुनौतियां

एक समय यह तालाब बारिश का पानी संजोने और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र (ecosystem) को सहारा देने का मुख्य केंद्र था। लेकिन सालों की उपेक्षा, कचरे के ढेर और अतिक्रमण के कारण यह पूरी तरह सूख चुका था और अपनी पहचान खो बैठा था। स्थानीय लोगों को भी नहीं लगता था कि इसे कभी सुधारा जा सकता है।

7 महीने की तैयारी और 24 घंटे का ‘मिशन’

तालाब के कायाकल्प का काम रातों-रात नहीं हुआ। गुरुनंदन राव ने इस पर काम शुरू करने से पहले करीब 7 महीने का लंबा समय बिताया:

  • प्रशासनिक प्रक्रिया: सरकारी अधिकारियों से अनुमति लेना और कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करना।

  • जन-भागीदारी: स्थानीय निवासियों से संवाद करना और अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया को अंजाम देना।

इसके बाद, एक रात सुबह 2 बजे टीम ने मुख्य काम शुरू किया। मशीनों और स्वयंसेवकों की मदद से सालों से जमा गाद (silt) और कचरा साफ किया गया। महज 24 घंटों के भीतर, तालाब को उसका मूल आकार वापस मिल गया।

परिणाम: लौट आई हरियाली और जीव-जंतु

काम के कुछ दिन बाद ही बारिश हुई और तालाब में फिर से पानी जमा होने लगा। इसकी जल धारण क्षमता (water holding capacity) अब पहले से दोगुनी हो गई है। तालाब के पुनर्जीवित होते ही वहां फिर से किंगफिशर और बगुले जैसे पक्षी लौटने लगे हैं, जो पर्यावरण के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

आगे की राह

गुरुनंदन राव और उनके 11,000 स्वयंसेवकों की टीम अब तक कर्नाटक में 34 जल निकायों को पुनर्जीवित कर चुकी है। उनका सपना केवल तालाबों को साफ करना नहीं, बल्कि उनके आसपास फलदार और देशी पेड़ लगाकर उन्हें एक समृद्ध जैव-विविधता केंद्र (biodiversity hub) बनाना है।

यह कहानी साबित करती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और सामूहिक प्रयासों से प्रकृति को फिर से पनपने में मदद की जा सकती है।

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