पेपर लीक पर मोदी सरकार का बड़ा एक्शन: लोकसभा में पास हुआ नया संशोधन विधेयक; दोषी को 10 साल तक की जेल और भारी जुर्माना
नए कानून में 10 साल तक की जेल, ₹50 लाख का जुर्माना और संगठित अपराध पर ₹10 करोड़ का दंड; 2 महीने में जांच पूरी करने का नियम

नई दिल्ली, 29 जुलाई 2026: देश में पिछले कुछ समय से प्रतियोगी परीक्षाओं में हो रही धांधली और पेपर लीक की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बेहद सख्त कदम उठाया है। लोकसभा ने आज ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ को मंजूरी दे दी है। इस नए विधेयक का मुख्य उद्देश्य देश की सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता को बहाल करना और मेधावी छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करना है।
यह विधेयक साल 2024 में बनाए गए मूल कानून में संशोधन करता है और दोषियों के लिए सजा व जुर्माने के प्रावधानों को पहले से कहीं ज्यादा कड़ा बनाता है।

नए कानून में क्या बदलेगा? (मुख्य प्रावधान)
नए संशोधन विधेयक के तहत पेपर लीक और परीक्षाओं में नकल कराने वाले सिंडिकेट्स पर नकेल कसने के लिए निम्नलिखित प्रावधान किए गए हैं:
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सजा की अवधि बढ़ी: अनुचित साधनों (Unfair Means) का इस्तेमाल करने वाले या इसमें शामिल व्यक्तियों के लिए न्यूनतम सजा को 3 साल से बढ़ाकर 5 साल और अधिकतम 10 साल कर दिया गया है।
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जुर्माना 5 गुना बढ़ा: ऐसे अपराधों के लिए अधिकतम जुर्माने की राशि ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹50 लाख कर दी गई है।
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संगठित अपराध (Organised Crime) पर ₹10 करोड़ का जुर्माना: पेपर लीक करने वाले संगठित सिंडिकेट या नेटवर्क के मामलों में न्यूनतम जेल की सजा 5 साल से बढ़ाकर 7 साल (अधिकतम 10 साल) कर दी गई है, जबकि न्यूनतम जुर्माना ₹10 करोड़ तय किया गया है।
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सर्विस प्रोवाइडर्स पर भी कड़ा एक्शन: परीक्षा आयोजित कराने वाली निजी एजेंसियों या कंपनियों (Service Providers) के दोषी पाए जाने पर जुर्माना ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ कर दिया गया है। इसके साथ ही उन्हें परीक्षाओं से प्रतिबंधित (Debar) करने की अवधि 4 साल से बढ़ाकर 8 साल कर दी गई है।
फास्ट-ट्रैक कोर्ट और 2 महीने में जांच पूरी करने का नियम
मामलों के त्वरित निपटारे के लिए इस संशोधन विधेयक में न्याय प्रक्रिया को समयबद्ध (Time-bound) बनाया गया है:
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स्पेशल टास्क फोर्स (STF): पेपर लीक और परीक्षा धांधली से जुड़े मामलों की जांच के लिए केंद्र सरकार एक विशेष टास्क फोर्स का गठन कर सकती है।
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2 महीने में जांच: किसी भी एजेंसी या पुलिस द्वारा मामले की जांच को 2 महीने के भीतर पूरा करना अनिवार्य होगा।
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स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट: हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट (Special Fast Track Courts) बनाए जाएंगे, जहां रोजाना (day-to-day) सुनवाई होगी।
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3 महीने में फैसला: चार्जशीट दाखिल होने के 3 महीने के भीतर अदालत को अपना फैसला सुनाना होगा।
“छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं”
सदन में विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार देश की परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कानून मेधावी छात्रों के अधिकारों की रक्षा करेगा और परीक्षाओं में गड़बड़ी करने वाले बड़े से बड़े माफिया को भी नहीं बख्शा जाएगा।
यह कानून UPSC, SSC, रेलवे (RRB), IBPS और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) समेत केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा आयोजित की जाने वाली सभी प्रमुख सार्वजनिक परीक्षाओं पर लागू होगा।
इस विधेयक के विस्तृत विश्लेषण और कानूनी बारीकियों को जानने के लिए आप PRS Legislative Research की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं।



