भारत के ‘प्रोजेक्ट चीता’ को नई उड़ान: दक्षिण अफ्रीका से आएंगे 8 और चीते
कूनो नेशनल पार्क बनेगा मुख्य केंद्र; नौरादेही और बन्नी अभयारण्यों में भी बसेंगे नए मेहमान

10 जुलाई, नई दिल्ली: भारत के महत्वाकांक्षी ‘प्रोजेक्ट चीता’ को एक और बड़ी सफलता मिली है। इस परियोजना के सकारात्मक परिणामों से उत्साहित होकर, दक्षिण अफ्रीका सरकार ने भारत को 6 से 8 और चीते भेजने पर अपनी सहमति दे दी है। इस संबंध में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय और दक्षिण अफ्रीका के शीर्ष नेतृत्व के बीच चर्चा के बाद यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है।

कूनो ही रहेगा मुख्य केंद्र
भविष्य में भी कूनो नेशनल पार्क (मध्य प्रदेश) इन नए चीतों के लिए ‘लॉन्चिंग ग्राउंड’ बना रहेगा। कूनो में चीतों के लिए पहले से ही अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ढांचा तैयार किया गया है, जो नए मेहमानों के स्वागत के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।

चीतों के लिए बनेंगे नए ठिकाने
चीतों की बढ़ती संख्या और उनके बेहतर प्रबंधन को देखते हुए, सरकार अब कूनो के अलावा अन्य क्षेत्रों पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है:
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नौरादेही अभयारण्य: मध्य प्रदेश स्थित नौरादेही अभयारण्य को चीतों का तीसरा घर बनाने की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है।
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बन्नी अभयारण्य: गुजरात के बन्नी अभयारण्य को भी चीतों के नए ठिकाने के रूप में विकसित करने की तैयारी है।
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चीता कॉरिडोर: राजस्थान सरकार ने भी राज्य में चीतों को बसाने की इच्छा जताई है। इसे देखते हुए कूनो से राजस्थान के अभयारण्यों तक एक ‘चीता कॉरिडोर’ बनाने का प्रस्ताव भी विचाराधीन है।

प्रोजेक्ट चीता: एक नजर में
2022 में शुरू हुई इस अनूठी पहल के तहत भारत ने अब तक नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका और बोत्सवाना से चीते प्राप्त किए हैं। वर्तमान में कूनो और गांधी सागर अभयारण्यों में चीते न केवल खुले जंगल में विचरण कर रहे हैं, बल्कि अपना शिकार भी खुद कर रहे हैं, जो उनकी अनुकूलन क्षमता को साबित करता है। सबसे सुखद पहलू यह है कि भारत की धरती पर जन्मे चीते अब वयस्क हो रहे हैं, जो इस मिशन की एक बड़ी उपलब्धि है।




