नेपाल-तिब्बत में भीषण बाढ़: मृतकों की संख्या 1,250 के पार, 4,000 से अधिक लोग अभी भी लापता
काठमांडू और तिब्बत के सीमावर्ती इलाकों में भूस्खलन और फ्लैश फ्लड से भारी तबाही, सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए अंतरराष्ट्रीय बचाव कार्य जारी

काठमांडू/बीजिंग, 3 सितंबर 2026: नेपाल और तिब्बत के सीमावर्ती इलाकों में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड (आकस्मिक बाढ़) के कारण स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। इस प्राकृतिक आपदा में जान गंवाने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 1,250 से अधिक हो गई है, जबकि 4,000 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं।

लापता लोगों की तलाश में राहत और बचाव दल लगातार बारिश, मलबे और प्रतिकूल परिस्थितियों से जूझ रहे हैं। नेपाल में भोटेकोशी नदी के तटीय इलाकों की सुरंगों और भूमिगत बिजलीघरों में फंसे लोगों को निकालने के लिए बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने प्रतिनिधि सभा को संबोधित करते हुए कहा कि इस आपदा का सीधे तौर पर जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज) से संबंध है और इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रमुखता से उठाया जाना चाहिए। लापता लोगों में 583 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।

नेपाल सेना सहित सुरक्षा बलों के संयुक्त अभियानों के जरिए अब तक हवा और जमीन दोनों रास्तों से 11,993 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। बचाव कार्यों के लिए 21,314 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। दूसरी ओर, चीन के तिब्बत स्थित ग्यिरोंग काउंटी में भी इस बाढ़ से भारी तबाही हुई है, जहां मृतकों की संख्या 21 हो गई है और 541 लोग लापता हैं।
आपदा से निपटने के लिए भारत, चीन और दक्षिण कोरिया की विशेषज्ञ टीमें नेपाल पहुंच चुकी हैं। इसके अलावा एशियाई विकास बैंक (ADB), विश्व बैंक, यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया है।




