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Video: मौत का पाइपलाइन: 16 मीटर नीचे दफन 5 जिंदगियाँ और खामोश सिस्टम की साजिश!

अंधेरी सुरंग में अंतिम सांसें: पारिया त्रासदी—वो 13 घंटे जब समुद्र के नीचे सब कुछ थम गया था।

त्रिनिडाड: फरवरी 2022 में त्रिनिडाड के तट पर हुई ‘पारिया डाइविंग त्रासदी’ (Paria Diving Incident) समुद्री इतिहास की सबसे भयावह और विवादित घटनाओं में से एक  है। यह केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि कॉर्पोरेट लापरवाही और व्यवस्था की विफलता का एक काला अध्याय है, जिसमें पांच गोताखोरों की जान दांव पर लग गई थी।

घटना का खौफनाक मंजर

25 फरवरी 2022 को, ‘पारिया फ्यूल ट्रेडिंग कंपनी’ (Paria Fuel Trading Company) के लिए काम करने वाले पांच अनुभवी गोताखोर—क्रिस्टोफर बुद्रम, काज़मल जूनियर, यूसुफ हेनरी, फाजिल करबान और ऋषि नागज़ार—एक अंडरवॉटर ऑयल पाइपलाइन की मरम्मत के लिए उतरे थे।

दोपहर करीब 3 बजे, एक छोटी सी तकनीकी गलती के कारण ‘डेल्टा पी’ (Delta P) यानी दबाव का भारी अंतर पैदा हुआ। पाइपलाइन के अंदर वैक्यूम जैसी स्थिति बनी हुई थी, और जैसे ही गोताखोरों ने पाइपलाइन का प्लग हटाया, समुद्र का पानी एक शक्तिशाली भंवर की तरह उन्हें पाइप के भीतर खींच ले गया ।

13 घंटे का खौफ और चमत्कारिक बचाव

पानी के अंदर 16 मीटर गहराई में स्थित 30 इंच चौड़ी पाइपलाइन में फंसने के बाद, गोताखोरों की स्थिति नरक जैसी थी। पाइप के अंदर का वातावरण तेल के अवशेषों और जहरीले धुएं से भरा था।

अंधेरे और घुटन के बीच, क्रिस्टोफर बुद्रम ने अदम्य साहस दिखाते हुए बाहर निकलने का रास्ता ढूंढा और घटनास्थल से सुरक्षित निकाल लिए गए। बाहर आते ही उन्होंने अधिकारियों से गुहार लगाई कि उनके चार साथी पाइप के अंदर एक छोटे से एयर पॉकेट में जीवित हैं और उन्हें तुरंत बचाया जा सकता है ।

कंपनी की ‘घोर लापरवाही’

दुर्भाग्यवश, बचाव अभियान के बजाय कंपनी ने ‘सुरक्षा कारणों’ और कानूनी जवाबदेही से बचने की चिंताओं को प्राथमिकता दी । बचाव के लिए पहुंचे गोताखोरों को पाइपलाइन में जाने से रोक दिया गया, जबकि अंदर से लगातार मदद के लिए पाइपलाइन पर दस्तक (Knocking) सुनाई दे रही थी।

अंततः, 13 घंटे बाद जब कंपनी ने दबाव कम करने के लिए पाइपलाइन का फ्लैंज हटाया, तो पाइप के अंदर बची-खुची हवा भी बाहर निकल गई और चारों गोताखोरों की दर्दनाक मौत हो गई।

न्याय की अनिश्चित राह

एक सरकारी जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट में पारिया कंपनी के रवैये को ‘घोर लापरवाही’ और ‘आपराधिक’ करार दिया । हालांकि, मामले में कानूनी पेचीदगियां और ‘स्टैच्यूट ऑफ लिमिटेशन’ (समय सीमा) की तकनीकी बाधाएं अब न्याय के रास्ते में खड़ी हैं । सितंबर 2024 में प्रबंधकों पर आरोप तय किए गए, लेकिन मामला अभी भी कानूनी पचड़ों में फँसा हुआ है। जून 2025 तक की स्थिति के अनुसार, प्रिवी काउंसिल (Privy Council) इस बात पर विचार कर रही है कि क्या इस मामले में किसी को कानूनी रूप से जवाबदेह ठहराया जा सकता है या नहीं।

यह त्रासदी आज भी इस बात की याद दिलाती है कि जब सुरक्षा से अधिक लाभ को महत्व दिया जाता है, तो परिणाम कितने विनाशकारी हो सकते हैं ।

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