अमेरिका का बड़ा एक्शन: भारत-चीन से आने वाले सामानों पर लग सकता है 100 फीसदी आयात शुल्क, जानें क्या है नया अमेरिकी बिल
रूसी ऊर्जा सेक्टर को पंगु बनाने के लिए अमेरिकी सांसदों ने कड़ा किया रुख, अगस्त से पहले बिल पास होने की उम्मीद

15 जुलाई, नई दिल्ली: रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को खत्म करने और रूसी अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले ऊर्जा क्षेत्र (Energy Sector) को चोट पहुंचाने के लिए अमेरिकी सांसदों ने एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। वॉशिंगटन में मंगलवार को अमेरिकी सीनेट के एक द्विदलीय समूह (Bipartisan Group) ने एक नए प्रतिबंध विधेयक (Sanctions Bill) की घोषणा की है।
इस नए बिल के तहत रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले भारत और चीन समेत पांच प्रमुख देशों पर 100 फीसदी तक का भारी-भरकम आयात शुल्क (Tariff) लगाने का प्रस्ताव दिया गया है। व्हाइट हाउस ने भी इस बिल का समर्थन किया है, और उम्मीद जताई जा रही है कि यह विधेयक इसी साल अगस्त से पहले पारित हो सकता है।

किन देशों पर गिरेगी गाज?
मंगलवार को वाशिंगटन में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अमेरिकी सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंटथल (Senator Richard Blumenthal) ने इस विधेयक की बारीकियों को साझा किया। उन्होंने बताया कि यह टैरिफ बेहद लक्षित (Targeted) और सीमित होंगे, जो मुख्य रूप से रूसी तेल खरीदने वाले पांच बड़े देशों पर केंद्रित हैं।
वर्तमान में रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीदने वाले ये पांच देश हैं:
1. भारत
2. चीन
3. स्लोवाकिया
4. हंगरी
5. अज़रबैजान
गैस आयात पर कुछ छूट:** सीनेटर ब्लूमेंटथल ने स्पष्ट किया कि प्राकृतिक गैस (Natural Gas) के खरीदारों के लिए इस बिल में कुछ ढील दी गई है। यह अपवाद उन देशों के लिए है जो रूस की कुल प्राकृतिक गैस का 15% से कम आयात करते हैं और अपने आयात को कम करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठा रहे हैं।

पिछले ‘सेंक्शनिंग रशिया एक्ट’ से कितना अलग है यह बिल?
यह नया विधेयक पिछले साल अप्रैल में अमेरिकी सीनेट में पेश किए गए ‘सेंक्शनिंग रशिया एक्ट’ (Sanctioning Russia Act) का एक नरम या संशोधित रूप है।
पिछला प्रस्ताव:पुराने बिल में रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर **500 प्रतिशत तक** का अत्यधिक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था, जिससे भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं को बड़ा झटका लग सकता था।
क्यों रुका था पुराना बिल?
अत्यधिक सख्त प्रावधानों के कारण अमेरिकी सांसदों के बीच ही इसे लेकर चिंताएं थीं। साथ ही, तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से भी इस बिल को मजबूत समर्थन नहीं मिल सका था, जिसके कारण यह वोटिंग स्टेज तक नहीं पहुंच पाया।
डेमोक्रेटिक सीनेटर जीन शाहीन (Jeanne Shaheen) ने साफ किया कि नया बिल पुराने बिल की तुलना में बहुत अधिक संतुलित है और इसके टैरिफ प्रावधान काफी सीमित (Narrower) रखे गए हैं, ताकि वैश्विक व्यापार संतुलन पूरी तरह न बिगड़े।
यूएसटीआर (USTR) तय करेगा टैरिफ की सटीक दरें
सीनेटर ब्लूमेंटथल के अनुसार, इस बिल को अगस्त से पहले पारित कराने के लिए पर्याप्त समर्थन हासिल है। हालांकि, भारत और चीन जैसे देशों पर वास्तव में कितने प्रतिशत का टैरिफ लगाया जाएगा, इसका अंतिम फैसला अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR – US Trade Representative)द्वारा किया जाएगा।
ब्लूमेंटथल ने कहा, “हमने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि के साथ व्यापक चर्चा की है। हमें विश्वास है कि टैरिफ की दरें ऐसी तय की जाएंगी जो चीन, भारत और अन्य प्रमुख खरीदारों को रूसी तेल और गैस खरीदने से हतोत्साहित (Discourage) कर सकें। अगर भविष्य में इस दर को कम किया जाता है, तो इसके लिए कांग्रेस को रिपोर्ट और प्रमाणन देना अनिवार्य होगा।
दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम को दी गई श्रद्धांजलि
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सांसदों ने भावुक होते हुए पिछले सप्ताह अचानक दुनिया को अलविदा कह गए दिग्गज अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम (Lindsey Graham) को याद किया। सांसदों ने इस कानून को तैयार करने में उनके योगदान की सराहना की। ग्राहम ‘सेंक्शनिंग रशिया एक्ट 2025’ के मुख्य पैरोकारों में से एक थे और अपनी मृत्यु से पहले तक वे इस नए प्रतिबंध विधेयक को आगे बढ़ाने में सक्रिय रूप से जुटे हुए थे।
निष्कर्ष और भारत पर असर
अगर यह बिल अमेरिकी सीनेट से पास हो जाता है, तो भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक चुनौती खड़ी हो सकती है। यूक्रेन युद्ध के बाद से ही भारत ने रूस से रिकॉर्ड मात्रा में सस्ते कच्चे तेल का आयात किया है। अब देखना यह होगा कि यदि अमेरिका 100% तक टैरिफ लगाने का फैसला करता है, तो भारत सरकार और वैश्विक बाजार इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।




