
14 जुलाई, ईटानगर: अरुणाचल प्रदेश इस समय भीषण प्राकृतिक आपदा की चपेट में है। राज्य में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (SEOC) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं से राज्य के सभी 26 जिलों के 425 गांव प्रभावित हुए हैं, और अब तक 97,182 लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं। इस आपदा में अब तक सात लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।
कुरुंग कुमे जिला सबसे अधिक प्रभावित
सोमवार को कुरुंग कुमे जिले में कुमे नदी के उफान पर आने से स्थिति और गंभीर हो गई। डामिन और पारसी-पारलो क्षेत्रों में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। कई महत्वपूर्ण पुल बह गए हैं, जिससे सड़क संपर्क पूरी तरह टूट गया है। बाढ़ का पानी आवासीय इलाकों और सरकारी भवनों में घुस गया है, जिससे भारी नुकसान हुआ है। इसके अलावा, यहाँ स्थित सेंट थॉमस स्कूल का परिसर पूरी तरह जलमग्न हो गया, जिसके कारण शैक्षणिक गतिविधियां फिलहाल रोक दी गई हैं।
बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान
रिपोर्ट के अनुसार, राज्य को बुनियादी ढांचे के स्तर पर भारी क्षति हुई है:
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सड़क और परिवहन: लगभग 150 सड़कें और 19 पुल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
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सरकारी संपत्ति: 58 सरकारी इमारतें और 21 culverts (पुलिया) प्रभावित हुए हैं।
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उपयोगिताएं: 156 बिजली लाइनें और 224 बिजली के खंभे गिर गए हैं।
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कृषि: 541 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि और 1,000 हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र बाढ़ की भेंट चढ़ गया है।
राहत और बचाव कार्य जारी
राज्य प्रशासन, एनडीआरएफ (NDRF) और सुरक्षा बल युद्धस्तर पर राहत कार्यों में जुटे हैं। हालांकि, खराब मौसम और सड़कों के कट जाने के कारण बचाव दलों को भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। पाकके केसांग जिले में एनएच-13 (NH-13) का एक बड़ा हिस्सा भूस्खलन के कारण ब्लॉक हो गया है, जिसे खोलने में अभी दो से तीन दिन का समय लगने की संभावना है। प्रशासन ने लोगों को प्रभावित इलाकों में अनावश्यक यात्रा न करने की सलाह दी है।
तटीय इलाकों और संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन द्वारा लगातार निगरानी रखी जा रही है। आपदा प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और उन्हें आवश्यक राहत सामग्री उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।




