सोनाई-रूपाई अभयारण्य में लौटी हरियाली, अवैध बेदखली के बाद हाथियों के झुंड फिर आए नजर
असम के शोणितपुर में वनीकरण अभियानों से बहाल हुआ पारिस्थितिक संतुलन, पीएम मोदी ने 'मन की बात' में की सराहना

गुवाहाटी/शोणितपुर (असम) 29 सितंबर, 2026: असम के शोणितपुर जिले में स्थित ऐतिहासिक सोनाई-रूपाई वन्यजीव अभयारण्य से एक राहत भरी और सुखद खबर सामने आई है। जंगलों से अवैध अतिक्रमण हटाए जाने और व्यापक स्तर पर चलाए गए पौधारोपण अभियानों के कारण क्षेत्र का पारिस्थितिक संतुलन बहाल होने लगा है। इसके परिणामस्वरूप, वर्षों पहले मानवीय दखल के कारण अभयारण्य छोड़कर चले गए हाथियों के झुंड अब अपने प्राकृतिक आवास में वापस लौटने लगे हैं।
‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री मोदी ने की सराहना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 138वें एपिसोड में सोनाई-रूपाई वन्यजीव अभयारण्य का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इंसानी हस्तक्षेप और अतिक्रमण के चलते कभी हाथियों ने इस क्षेत्र से पलायन कर लिया था। हालांकि, लगभग तीन साल पहले शुरू किए गए अतिक्रमण रोधी अभियान के बाद अब यहां पर्यावरण में सुधार हुआ है और गजराज की घर वापसी हुई है।
अभयारण्य से जुड़ी मुख्य बातें:
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विस्तार और स्थापना: हिमालय की तलहटी में बसा यह अभयारण्य 220 वर्ग किलोमीटर के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है। इसे आधिकारिक तौर पर 4 सितंबर, 1998 को वन्यजीव अभयारण्य के रूप में अधिसूचित किया गया था।
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हाथियों की संख्या में बढ़ोतरी: असम वन विभाग की 2024 की हाथी जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, इस अभयारण्य के भीतर 140 हाथियों की उपस्थिति दर्ज की गई थी।
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पुनरुद्धार प्रयास: बेदखली अभियानों के जरिए खाली कराई गई भूमि पर वनीकरण (afforestation) के जरिए हरियाली बहाल की गई है, जिससे जंगलों का प्राकृतिक रूप फिर से उभर कर सामने आ रहा है।
स्थानीय प्रशासन और वन विभाग के अनुसार, हाथियों के झुंड अब अभयारण्य के उन हिस्सों में भी देखे जा रहे हैं, जहां वे कई दशकों से नजर नहीं आए थे। सोनाई-रूपाई में हो रहे इस बदलाव को पूर्वोत्तर में वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण संतुलन की दिशा में एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।




