
चंडीगढ़, 27 अक्टूबर 2026: पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय (High Court) ने राज्य के लाखों सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए पंजाब सरकार और उसके प्रशासन को करारा झटका दिया है। कर्मचारियों के लंबे समय से लंबित भत्तों और सेवा-संबंधी न्यायसंगत मांगों पर समय पर कार्रवाई न करने और अदालती आदेशों के बावजूद जवाब दाखिल करने में ढिलाई बरतने पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य के मुख्य सचिव और पंजाब सरकार पर 1 लाख रुपये का जुर्माना (Cost) लगाया है।
कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत
- लंबित भत्तों पर त्वरित कार्रवाई का निर्देश: हाईकोर्ट के सख्त रुख से राज्य सरकार के कर्मचारियों को अपने लंबे समय से रुके महंगाई भत्ते (DA) और अन्य वित्तीय लाभों के जल्द भुगतान का रास्ता साफ हो गया है।
- प्रशासनिक टालमटोल पर ब्रेक: कर्मचारियों द्वारा दायर याचिकाओं पर सरकार की टालमटोल की नीति को खारिज करते हुए कोर्ट ने समय-सीमा तय कर तुरंत पालन करने की हिदायत दी है।
- हजारों परिवारों को संबल: त्यौहारों और मौजूदा महंगाई के दौर में अदालत का यह हस्तक्षेप कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है।
हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी और जुर्माना
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति की पीठ ने राज्य सरकार की ओर से बार-बार मांगी जा रही तारीखों और ढीले-ढाले रवैये पर भारी नाराजगी जताई:
- सख्त हिदायत: पीठ ने कहा कि कर्मचारियों के जायज हकों से जुड़ी फाइलों को अटकाना और न्यायिक प्रक्रिया में बेवजह विलंब करना स्वीकार्य नहीं है।
- मुख्य सचिव पर जवाबदेही: प्रशासनिक तंत्र की इस लापरवाही की जिम्मेदारी तय करते हुए हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को ₹1 लाख का जुर्माना विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा कराने का आदेश दिया।
सरकार पर बढ़ा दबाव
उल्लेखनीय है कि पंजाब के सरकारी कर्मचारी पिछले कई महीनों से अपने बकाये भत्तों और वेतन विसंगतियों को लेकर आंदोलनरत थे। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब सरकार पर कर्मचारियों के बकाया का अविलंब भुगतान करने का भारी दबाव बन गया है। कर्मचारी संगठनों ने उच्च न्यायालय के इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे न्याय की जीत बताया है।




