पंचकूला स्कूल में बच्ची पर हमले का मामला: बाल अधिकार आयोग ने लिया स्वतः संज्ञान, जिला शिक्षा अधिकारी से मांगी रिपोर्ट
नर्सरी की छात्रा पर तीसरी कक्षा के छात्र के कथित हमले का मामला; हरियाणा बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने डीईओ को नोटिस जारी कर विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की

पंचकूला, 31 अक्टूबर 2026: हरियाणा के पंचकूला स्थित एक स्कूल परिसर में तीसरी कक्षा के एक छात्र द्वारा किंडरगार्टन (नर्सरी) की एक मासूम बच्ची पर कथित तौर पर हमला करने की घटना पर हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (HSCPCR) ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने इस मामले का स्वतः संज्ञान (suo motu cognisance) लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी, पंचकूला को नोटिस जारी किया है।
आयोग ने मांगी विस्तृत और बिंदुवार रिपोर्ट
हरियाणा बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिए हैं कि वे इस पूरी घटना पर एक व्यापक, बिंदुवार तथ्यात्मक रिपोर्ट आयोग को सौंपें। रिपोर्ट में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा गया है:
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घटना की परिस्थितियां: यह घटना किन परिस्थितियों में घटित हुई।
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निगरानी व्यवस्था: घटना के समय स्कूल परिसर में बच्चों की देखरेख और पर्यवेक्षण के लिए क्या व्यवस्थाएं थीं।
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स्टाफ की तैनाती: स्कूल में शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की ड्यूटी व तैनाती का विवरण।
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स्कूल प्रशासन की प्रतिक्रिया: घटना के बाद स्कूल अधिकारियों द्वारा तुरंत क्या कदम उठाए गए।
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दस्तावेज और फुटेज: घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज, ड्यूटी रोस्टर, उपस्थिति रिकॉर्ड और शिक्षा विभाग द्वारा शुरू की गई जांच से जुड़ी प्रतियों को संलग्न करने के निर्देश दिए गए हैं।
Haryana State Commission for Protection of Child Rights (HSCPCR), has taken suo motu cognisance of the matter in which a third-grade student was allegedly assaulted a kindergarten girl inside the school premises in Panchkula and has directed the District Education Officer,… pic.twitter.com/kMJyJwLWYh
— ANI (@ANI) October 31, 2026
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पंचकूला के एक स्कूल परिसर में हुई इस हिंसात्मक घटना में छह वर्षीय मासूम बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई थी। आरोप है कि तीसरी कक्षा के एक छात्र ने बच्ची पर कथित तौर पर हमला किया, जिससे उसके चेहरे और नाक पर गंभीर चोटें आईं। घटना के तुरंत बाद बच्ची को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहाँ से उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे चंडीगढ़ स्थित स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (PGIMER) रेफर कर दिया गया था।
बच्चों की सुरक्षा और जवाबदेही पर जोर
आयोग ने इस बात पर गहरी चिंता जताई है कि शिक्षण संस्थानों के भीतर इस तरह की घटनाएं बच्चों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े करती हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक शैक्षणिक संस्थान की यह नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी है कि वह अपने परिसर में पढ़ने वाले प्रत्येक बच्चे की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करे।
बाल अधिकार आयोग इस बात की भी जांच करेगा कि क्या इस घटना के पीछे पर्यवेक्षण या बच्चों की सुरक्षा प्रबंधों में कोई प्रशासनिक चूक तो नहीं रही है। रिपोर्ट के आधार पर दोषियों और लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।




