
कोलकाता: मानसून की भारी बारिश ने पश्चिम बंगाल में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। राज्य के उत्तरी हिस्सों में जहां लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने तबाही मचा रखी है, वहीं कोलकाता और दक्षिण बंगाल के कई जिलों में जलजमाव ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

दार्जिलिंग में प्राकृतिक आपदा और तबाही
दार्जिलिंग की पहाड़ियों में मूसलाधार बारिश के चलते कई स्थानों पर भूस्खलन (landslides) की खबरें सामने आई हैं। इन भूस्खलनों के कारण दार्जिलिंग के पहाड़ी इलाकों और सिलीगुड़ी शहर के बीच संपर्क टूट गया है। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब भारी बारिश के दबाव में एक पुल ढह गया, जिससे आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है। NH 110 पर यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिससे स्थानीय लोगों और पर्यटकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पड़ोसी राज्यों से आए पानी का दबाव
अधिकारियों के अनुसार, केवल बंगाल ही नहीं, बल्कि पड़ोसी देश भूटान और सिक्किम में हो रही भारी बारिश ने भी स्थिति को जटिल बना दिया है। इन राज्यों से बड़ी मात्रा में पानी आने के कारण उत्तर बंगाल की नदियां, विशेषकर तीस्ता और बालसन (महानंदा की प्रमुख सहायक नदी), खतरे के निशान के करीब पहुंच गई हैं। जलस्तर में अचानक वृद्धि ने तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए चिंता बढ़ा दी है।

कोलकाता और दक्षिण बंगाल में जलजमाव
राजधानी कोलकाता में भी भारी बारिश का असर साफ देखा जा रहा है। शहर के कई निचले इलाकों में पानी भर गया है, जिससे प्रमुख सड़कों पर भारी ट्रैफिक जाम लग गया है। काम पर जाने वाले लोगों और आम नागरिकों को सड़कों पर घुटनों तक भरे पानी से होकर गुजरना पड़ा। दक्षिण बंगाल के अन्य जिलों से भी ऐसी ही खबरें आ रही हैं।

मौसम विभाग का अलर्ट
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए चेतावनी जारी की है। जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार जिलों के कुछ हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश और कहीं-कहीं अत्यंत भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। इसके लिए मौसम विभाग ने ‘रेड अलर्ट’ जारी किया है।
प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति पर नजर बनाए हुए है और बचाव कार्य जारी है। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से पहाड़ी रास्तों या जलजमाव वाले क्षेत्रों में जाने से बचने की सलाह दी है।




