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राम मंदिर ट्रस्ट: चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार, विपक्ष का हमला – “क्या दोषियों पर होगी कार्रवाई?”

मंदिर ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक में हुआ बड़ा बदलाव; इस्तीफे के बाद सियासी गलियारों में मची हलचल और उठ रहे हैं तीखे सवाल

6 जुलाई, अयोध्या: राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। ट्रस्ट ने उनके स्थान पर बजरंग बागरा को नया महासचिव नियुक्त किया है।

यह निर्णय ट्रस्ट की एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान लिया गया, जो अयोध्या स्थित मंदिर परिसर में आयोजित की गई थी।

इस्तीफा और जांच का घटनाक्रम

चंपत राय ने 26 जून को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उनका इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब मंदिर को मिले दान की कथित चोरी और हेराफेरी को लेकर जांच चल रही है। इस मामले में पुलिस अब तक चंपत राय के ड्राइवर, रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू सहित कुल आठ लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।

ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक

सूत्रों के अनुसार, यह बैठक ट्रस्ट के गठन (2020) के बाद से अब तक की सबसे महत्वपूर्ण बैठकों में से एक मानी जा रही है। इस बैठक का मुख्य केंद्र जांच की स्थिति और मंदिर के प्रशासन में आवश्यक सुधारों पर चर्चा करना था।

बैठक का आयोजन ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि द्वारा किया गया था और इसकी अध्यक्षता ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने की। इस बैठक में ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य, सरकारी प्रतिनिधि और कानूनी विशेषज्ञ भी मौजूद रहे।

बताया जा रहा है कि चंपत राय मंदिर परिसर में मौजूद थे, लेकिन उन्होंने इस बैठक में भाग नहीं लिया।

चंपत राय के इस्तीफे पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं

राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद, राजनीतिक गलियारों में पक्ष और विपक्ष की ओर से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं:

विरोधियों का पक्ष:

  • सपा नेता फखरुल हसन: उन्होंने कहा कि “इस्तीफे पहले ही आ जाने चाहिए थे। अब सवाल यह है कि क्या दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई की जाएगी।”

  • कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा: उन्होंने इस्तीफों को “दोष स्वीकार करने” के समान बताया। उन्होंने दावा किया कि इन इस्तीफों से यह साबित हो गया है कि ट्रस्ट में “डकैती” हुई थी और आरोप लगाया कि उनकी जगह लेने वाले लोगों का ट्रैक रिकॉर्ड भी साफ नहीं है।

समर्थन और बचाव में कहा गया:

  • ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गिरी: उन्होंने चंपत राय का बचाव करते हुए कहा कि वे उनकी नजरों में “बेदाग” हैं। उन्होंने मंदिर आंदोलन के लिए उनके “बलिदानों से भरे जीवन” को याद करते हुए कहा, “मैं उन्हें पिछले 32 वर्षों से जानता हूं और उनकी एकमात्र गलती यह है कि उन्होंने लोगों पर भरोसा किया। वे तब भी साइट पर मौजूद थे जब कोई भी इस आंदोलन को गंभीरता से नहीं ले रहा था।”

  • भाजपा सांसद दिनेश शर्मा: उन्होंने कहा कि दान चोरी के दोषियों को दंडित किया जाना चाहिए, लेकिन इस मामले का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए कदम उठाए जा रहे हैं।

  • आचार्य प्रमोद कृष्णम: उन्होंने कहा कि ट्रस्ट को भक्तों का विश्वास बनाए रखने के लिए “अग्निपरीक्षा” से गुजरना होगा और ट्रस्ट का यह फैसला स्वागत योग्य है। साथ ही, उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग इस मुद्दे का इस्तेमाल प्रधानमंत्री मोदी पर हमला करने के लिए कर रहे हैं।

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