लद्दाख के कृषि इतिहास में स्वर्णिम अध्याय: लेह में मात्र 30 दिनों में खिले केसर के फूल, बंजर भूमि पर लहराई सफलता
पारंपरिक रूप से 60 दिन लेने वाली केसर की फसल ने लद्दाख की कठिन परिस्थितियों में केवल एक महीने में ही दिए फूल, कृषि विभाग के इस पायलट प्रोजेक्ट से स्थानीय आर्थिकी और नए स्टार्टअप्स को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

लेह | 01 नवंबर 2026: लद्दाख के ऊंचे, ठंडे और शुष्क पहाड़ी इलाकों में कृषि जगत से एक बेहद सुखद और हैरान करने वाली खबर सामने आई है। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के लेह में पहली बार प्रायोगिक तौर पर की गई केसर की खेती ने अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। हाल ही में पुनर्जीवित की गई बंजर और खराब पड़ी भूमि पर उगाई गई केसर की फसल ने रिकॉर्ड तोड़ते हुए महज 30 दिनों के भीतर ही अपने पहले फूल दे दिए हैं।

सामान्य तौर पर, केसर की पारंपरिक खेती में पहली फसल और फूल आने में कम से कम दो महीने (लगभग 60 दिन) का समय लगता है, लेकिन लेह की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और अत्यधिक ठंड के बीच इस सफलता को आधे समय यानी केवल एक महीने में हासिल कर लिया गया है। एलजी लद्दाख ने खुद केसर के खेत का दौरा कर इस पहली फसल का निरीक्षण किया और इस ऐतिहासिक पल के गवाह बने।
Breaking new grounds in Ladakh’s high-altitude agricultural landscape!
Proud to announce that the experimental saffron cultivation, over recently restored degraded land in Leh, has begun to blossom, in a record-breaking 30 days, against the usual two-month timeline for the… pic.twitter.com/7a8YruTlMH
— LG Ladakh (@lg_ladakh) November 1, 2026
खेती से जुड़े उत्साहजनक आंकड़े:
-
दैनिक फूल: इस खेत में रोजाना औसतन 20 से 25 केसर के फूल खिल रहे हैं, जबकि एक दिन तो सुबह-सुबह एक साथ 72 फूल खिले हुए देखे गए।
-
अल्पकालिक उत्पादन: इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत मात्र 4 दिनों के भीतर ही लगभग 22 ग्राम शुद्ध और उच्च गुणवत्ता वाला केसर एकत्र किया जा चुका है।

स्थानीय आर्थिकी और नए स्टार्टअप्स को मिलेगा बढ़ावा प्रशासन का मानना है कि यह सफलता इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि लद्दाख की जलवायु और पर्यावरण में उच्च-तुंगता (हाई-आल्टीट्यूड) वाली विशेष फसलों की अपार संभावनाएं छिपी हैं। इस अभूतपूर्व सफलता से क्षेत्र में बड़े पैमाने पर व्यावसायिक उत्पादन का रास्ता साफ हो गया है।

भविष्य में इससे लद्दाख में कृषि-आधारित आजीविका, पर्यटन के साथ-साथ कृषि-उद्यमिता (एग्रो-बेस्ड आंत्रप्रेन्योरशिप) के नए रास्ते खुलेंगे, जिससे स्थानीय आर्थिकी को एक मजबूत संबल मिलेगा।

इस पायलट प्रोजेक्ट की इस शानदार सफलता के पीछे यूटी लद्दाख के कृषि विभाग और मैदानी स्तर पर दिन-रात मेहनत करने वाले समर्पित फील्ड स्टाफ की कड़ी मेहनत और सूझबूझ शामिल है, जिसकी चारों तरफ सराहना हो रही है।



