Features NewsInternational

अंतरिक्ष में एक अनोखी खोज: 57 प्रकाश वर्ष दूर स्थित ‘पिंक प्लैनेट’ पर हो रही है नमक की बारिश

जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप ने सुलझाया 'पिंक प्लैनेट' GJ504b का रहस्य, वैज्ञानिकों को वायुमंडल में मिले नमक के बादलों के प्रमाण

ब्यूरो: अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक नई और चौंकाने वाली खोज सामने आई है। पृथ्वी से 57 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित एक ग्रह, जिसे GJ504b या ‘पिंक प्लैनेट’ (गुलाबी ग्रह) के नाम से जाना जाता है, वैज्ञानिकों के लिए चर्चा का केंद्र बन गया है। जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) के माध्यम से किए गए नए शोध में पता चला है कि इस ग्रह के वायुमंडल में ‘नमक के बादल’ मौजूद हैं, जो वहां अजीबोगरीब मौसम का निर्माण करते हैं।

क्या है ‘पिंक प्लैनेट’ और यह क्यों है खास?

GJ504b को 2013 में खोजा गया था। इसे आधिकारिक तौर पर एक पारंपरिक ‘ग्रह’ के बजाय ‘प्लेनेटरी-मास कंपेनियन’ (Planetary-mass companion) के रूप में वर्गीकृत किया गया है, क्योंकि वैज्ञानिक अभी भी यह सुनिश्चित नहीं कर पाए हैं कि यह एक विशाल एक्सोप्लैनेट है या एक छोटा ‘ब्राउन ड्वार्फ’ (तारे जैसा पिंड)।

इस ग्रह का तापमान लगभग 550 डिग्री फ़ारेनहाइट (लगभग 287 डिग्री सेल्सियस) है। यद्यपि यह तापमान पृथ्वी के लिए अत्यंत घातक है, लेकिन अन्य ज्ञात एक्सोप्लैनेट्स की तुलना में यह काफी ठंडा माना जाता है। इसकी उम्र 2.5 अरब से 4 अरब वर्ष के बीच आंकी गई है।

कैसे हुई नमक के बादलों की खोज?

पहले के टेलीस्कोपों के लिए GJ504b की धुंधली रोशनी को पकड़ना और उसके वायुमंडल का विश्लेषण करना बेहद कठिन था। हालांकि, जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप ने अपनी उन्नत इंफ्रारेड तकनीक का उपयोग करके मात्र दो घंटे में इसके वायुमंडल का विस्तृत ‘केमिकल फिंगरप्रिंट’ तैयार किया।

शोधकर्ताओं, जिनका नेतृत्व नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के अनीश बाबूराज कर रहे हैं, ने पाया कि ग्रह के वायुमंडल में पानी की वाष्प, मीथेन, कार्बन डाइऑक्साइड और अमोनिया जैसे अणुओं के निशान मौजूद हैं। लेकिन, जब उन्होंने इन आंकड़ों को वैज्ञानिक मॉडलों के साथ मिलाया, तो वे तभी सटीक बैठे जब उन्होंने उसमें ‘नमक के बादलों’ (Salt clouds) की संभावना को शामिल किया।

भविष्य के शोध के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह खोज?

यह खोज केवल एक खगोलीय घटना नहीं है, बल्कि यह हमारे ब्रह्मांड को समझने के नजरिए को बदल रही है:

  • वायुमंडलीय विविधता: यह साबित करता है कि ग्रहों के बादल केवल पानी, अमोनिया या सिलिकेट्स से ही नहीं बनते, बल्कि नमक जैसे पदार्थ भी अजीबोगरीब वातावरण बना सकते हैं।

  • ग्रहों का विकास: चूंकि GJ504b ठंडा है और अपनी उम्र के एक महत्वपूर्ण चरण में है, इसलिए यह वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद कर सकता है कि अरबों वर्षों में विशाल ग्रहों का वायुमंडल कैसे विकसित होता है।

  • नई तकनीक का उपयोग: जेम्स वेब टेलीस्कोप की सफलता ने यह उम्मीद जगाई है कि भविष्य में हम और भी दूर स्थित और ठंडे ग्रहों के वायुमंडल का अध्ययन कर पाएंगे, जो पहले हमारी पहुंच से बाहर थे।

निष्कर्ष

‘पिंक प्लैनेट’ की यह खोज इस बात का प्रमाण है कि ब्रह्मांड हमारी कल्पना से कहीं अधिक विविध और जटिल है। GJ504b का अध्ययन वैज्ञानिकों को उन ग्रहों के बारे में अधिक जानकारी दे सकता है जो हमारे सौर मंडल के ग्रहों से पूरी तरह अलग हैं। यह शोध इस दिशा में एक नई शुरुआत है कि कैसे दूर के ग्रह अपना अनूठा ‘रासायनिक इतिहास’ और मौसम प्रणालियां तैयार करते हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button