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14,000 साल पहले अंधेरी गुफा में रेंगकर चला था आदिमानव का परिवार, वैज्ञानिकों को मिले अनोखे सबूत

इटली की 'ग्रोटा डेला बिसुरा' गुफा में मिले बच्चों के कदमों और घुटनों के 180 से अधिक निशान

23 जून, डिजिटल डेस्क: पुरातत्वविदों और वैज्ञानिकों को उत्तरी इटली की एक प्रसिद्ध गुफा, ग्रोटा डेला बिसुरा (Grotta della Bàsura) में एक ऐसा ऐतिहासिक खजाना मिला है, जिसने मानव इतिहास के पन्नों को एक नया मोड़ दे दिया है। वैज्ञानिकों ने गुफा के भीतर करीब 14,000 साल पुराना एक दुर्लभ मार्ग (ट्रेक) खोज निकाला है। हैरान करने वाली बात यह है कि यह मार्ग आदिमानवों के एक पूरे परिवार द्वारा घने अंधेरे में मशालों के सहारे तय किया गया था, जिसके सबूत आज भी मिट्टी पर जस के तस मौजूद हैं।

पाँच सदस्यों के परिवार का साहसिक सफर

वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक शोध (जो प्रसिद्ध जर्नल eLife में प्रकाशित हुआ है) के अनुसार, गुफा के प्रवेश द्वार से लगभग 400 मीटर से अधिक अंदर तक फैले इस रास्ते पर एक ही परिवार के पाँच सदस्यों के पैरों, घुटनों और हाथों के निशान मिले हैं।

इस पैलियोलिथिक (पुरापाषाण काल) समूह में शामिल थे:

  • दो वयस्क (Adults)

  • एक किशोर (Adolescent)

  • दो छोटे बच्चे (जिनमें से एक की उम्र लगभग 3 वर्ष और दूसरे की लगभग 6 वर्ष आंकी गई है)

एक दुर्लभ खोज: आमतौर पर आदिमानवों के पैरों के निशान अलग-अलग जगहों पर बिखरे हुए मिलते हैं, लेकिन यहाँ पूरा का पूरा परिवार एक साथ, एक ही कतार में आगे बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। यह इतिहास में पहली बार है जब बच्चों और वयस्कों को एक साथ इतने कठिन भूमिगत रास्ते पर चलते हुए रिकॉर्ड किया गया है।


जब घुटनों के बल रेंगना पड़ा…

यह रास्ता बेहद संकरा, गीला और ऊबड़-खाबड़ था। शोधकर्ताओं ने पाया कि गुफा के एक हिस्से में छत इतनी नीचे झुक गई थी कि वहाँ सीधे खड़े होकर चलना नामुमकिन था। वहाँ गुफा की ऊंचाई 80 सेंटीमीटर से भी कम थी।

मशाल की रोशनी में आगे बढ़ रहे इस परिवार को उस हिस्से को पार करने के लिए अपने हाथों और घुटनों के बल आना पड़ा। गुफा की गीली मिट्टी पर उनके रेंगने के स्पष्ट निशान (Crawling marks) मिले हैं, जो यह दर्शाते हैं कि प्राचीन काल में जीवित रहने या गुफा को तलाशने का संघर्ष कितना कठिन रहा होगा।

Watch the oldest human footprints ever found


180 से अधिक निशानों का विश्लेषण

इस ऐतिहासिक खोज को पुख्ता करने के लिए वैज्ञानिकों की टीम ने गुफा के भीतर 180 से अधिक निशानों का बारीकी से अध्ययन किया। इनमें शामिल हैं:

  1. नंगे पैरों के निशान (Footprints)

  2. नन्हे हाथों के छापे (Handprints)

  3. घुटनों के निशान (Knee marks)

  4. मिट्टी पर उंगलियों से बनी लकीरें

  5. मशालों से गिरा हुआ कोयला/चारकोल (Charcoal remains)

वैज्ञानिकों का कहना है कि ये निशान बिना किसी संदर्भ के बिखरे हुए नहीं थे। इनके क्रम और स्थिति को देखकर शोधकर्ता आसानी से यह अनुमान लगाने में कामयाब रहे कि जगह के संकरे होने, ढलान आने या रास्ता गीला होने पर इस परिवार ने अपनी चाल को किस तरह बदला था।


इतिहास का एक जीवंत ‘टाइम कैप्सूल’

यह खोज हमें यह समझने में मदद करती है कि हजारों साल पहले आदिमानव केवल शिकार ही नहीं करते थे, बल्कि अपने छोटे बच्चों के साथ मिलकर गुफाओं के सबसे गहरे और अंधेरे कोनों को तलाशने का साहस भी रखते थे। मिट्टी में दबे ये पदचिह्न किसी फिल्म की रील की तरह आदिमानवों के उस सफर को आज हमारे सामने जीवंत कर रहे हैं।


यह लेख MSN पर प्रकाशित Arezki Amiri की रिपोर्ट पर आधारित है।

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