NEET-EXAM का तनाव: हिंगोली में 18 वर्षीय छात्र ने की आत्महत्या, जान देने से पहले मां के लिए रिकॉर्ड किया भावुक वीडियो
पेपर लीक के बाद दोबारा हुई परीक्षा से दबाव में था छात्र; वीडियो में हाथ जोड़कर रोते हुए कहा— 'मम्मी मुझे माफ कर देना, अगले जन्म में फिर तेरी कोख से जन्म लूंगा'

25 जून, 2026: महाराष्ट्र के हिंगोली से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहां राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) की तैयारी कर रहे एक 18 वर्षीय छात्र ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। आत्मघाती कदम उठाने से ठीक पहले छात्र ने अपने मोबाइल पर एक भावुक वीडियो रिकॉर्ड किया, जिसमें उसने हाथ जोड़कर अपनी मां से माफी मांगी है।
मृतक छात्र की पहचान सुशील धागे के रूप में हुई है। पुलिस को दी गई शिकायत में परिजनों ने बताया कि सुशील नीट परीक्षा के दोबारा आयोजन (re-test) को लेकर भारी मानसिक दबाव में था, क्योंकि उसे यह पेपर काफी कठिन लगा था।
“अगले जन्म में फिर तेरी कोख से जन्म लूंगा”
सुशील ने जान देने से पहले अपनी मां के लिए 33 सेकंड का एक वीडियो संदेश रिकॉर्ड किया, जिसमें उसका दर्द साफ झलक रहा है। वीडियो में उसने रोते हुए और हाथ जोड़कर कहा:
“मम्मी, आज मैं अपनी जिंदगी खत्म करने जा रहा हूं। मम्मी, प्लीज आप बिल्कुल भी चिंता मत करना। अगले जन्म में मैं फिर से तुम्हारी ही कोख से पैदा होऊंगा और तुम्हें इस तरह का दुख कभी नहीं दूंगा। बस मुझे माफ कर देना, मम्मी। सुमेध (भाई) के साथ रहना और अपना पूरा ख्याल रखना, मेरी चिंता मत करना। मैं बहुत गहरे दर्द में हूं… मैं कुछ नहीं कर पा रहा हूं… मुझे अब कुछ समझ नहीं आ रहा है। मुझे माफ कर देना, मम्मी।”
यह वीडियो संदेश अपने परिवार को भेजने के बाद सुशील ने बुधवार को एक कुएं में कूदकर अपनी जान दे दी।
पेपर लीक और दोबारा परीक्षा का तनाव
देशभर के लाखों छात्रों की तरह सुशील भी लंबे समय से मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहा था। इस साल नीट (UG) परीक्षा पहले 3 मई को आयोजित की गई थी, लेकिन बड़े पैमाने पर हुए पेपर लीक के आरोपों के बाद 12 मई को इसे रद्द कर दिया गया था।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) इस मामले की जांच कर रही है और इस सिलसिले में पुणे के एक केमिस्ट्री लेक्चरर (कथित मास्टरमाइंड) सहित कई लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है। इसके बाद, 21 जून को सरकार द्वारा दोबारा परीक्षा (Retest) आयोजित की गई थी, जिसमें सुशील भी शामिल हुआ था। लेकिन पेपर के कठिन स्तर और अनिश्चितता के माहौल ने उसे मानसिक रूप से तोड़ दिया।
एक गंभीर चेतावनी
भारत में हर साल करीब 20 लाख से ज्यादा छात्र महज 1 लाख के करीब मेडिकल सीटों के लिए नीट परीक्षा में बैठते हैं। यह घटना एक बार फिर देश में प्रतियोगी परीक्षाओं के बढ़ते दबाव और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
यदि आप या आपके जानने वालों में कोई भी किसी मानसिक तनाव, अवसाद या कठिन दौर से गुजर रहा है, तो कृपया मदद मांगें। कई हेल्पलाइन नंबर और काउंसलर्स चौबीसों घंटे सहायता के लिए उपलब्ध हैं। आप अकेले नहीं हैं।




