दवा कंपनियों के लिए बड़ा बदलाव: अब हर दवा के बैच का देना होगा पूरा हिसाब, स्वास्थ्य मंत्रालय का नया प्रस्ताव
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 'ड्रग्स रूल्स, 1945' में संशोधन का नया ड्राफ्ट किया जारी; हर बैच के लिए 'बैच रिलीज सर्टिफिकेट' लेना और योग्य पेशेवर को अधिकृत करना होगा अनिवार्य।

नई दिल्ली, 4 नवंबर 2026: देश की दवा कंपनियों के लिए एक बड़ा और अहम बदलाव होने जा रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) ने देश में दवाइयों की गुणवत्ता और सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए ‘ड्रग्स रूल्स, 1945’ (Drugs Rules, 1945) में संशोधन करने का नया ड्राफ्ट जारी किया है। इस नए प्रस्ताव के तहत अब दवा कंपनियों के लिए प्रत्येक दवा के बैच का पूरा रिकॉर्ड रखना और अलग से ‘बैच रिलीज सर्टिफिकेट’ (Batch Release Certificate) लेना अनिवार्य कर दिया गया है।

नए नियमों के मुख्य बिंदु
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बैच रिलीज सर्टिफिकेट की अनिवार्यता: सरकार के नए प्रस्ताव के अनुसार, दवा के हर नए बैच के बाजार में आने से पहले उसके लिए अलग से ‘बैच रिलीज सर्टिफिकेट’ लेना जरूरी होगा।
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अधिकृत व्यक्ति की नियुक्ति: प्रत्येक बैच की रिलीज के लिए कंपनियों को एक योग्य और अनुभवी पेशेवर को अधिकृत करना होगा। यह अधिकृत व्यक्ति आधिकारिक तौर पर प्रमाणित करेगा कि दवा का निर्माण और उसका परीक्षण तयशुदा जीएमपी (
GMP– Good Manufacturing Practice) मानकों के अनुरूप ही किया गया है। -
विस्तृत रिकॉर्ड रखना अनिवार्य: दवा निर्माण से जुड़ी कंपनियों को अब मैन्युफैक्चरिंग, पैकेजिंग, टेस्टिंग, क्वालिटी जांच और जीएमपी अनुपालन का पूरा और सटीक रिकॉर्ड संभाल कर रखना होगा।
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सर्टिफिकेट में दर्ज होने वाली जानकारियां: इस सर्टिफिकेट में बैच नंबर, निर्माण-अवधि (Manufacturing Period), एक्सपायरी डेट, तथा मैन्युफैक्चरिंग और टेस्टिंग साइट से जुड़ी तमाम जरूरी जानकारियां विस्तार से दर्ज की जाएंगी।
समयसीमा और आगे की प्रक्रिया
स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी किए गए इस संशोधन ड्राफ्ट पर आम जनता, फार्मा सेक्टर के जानकारों और अन्य संबंधित पक्षों से अगले 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की गई हैं।
इन सुझावों पर विचार करने के बाद, नए नियमों को आधिकारिक गजट में अंतिम रूप से प्रकाशित किया जाएगा। प्रस्ताव के मुताबिक, गजट में प्रकाशन के ठीक 3 महीने बाद इन नए नियमों को पूरे देश में सख्ती से लागू कर दिया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से देश में बनने वाली दवाओं की गुणवत्ता पर पैनी नजर रखी जा सकेगी और मरीजों की सुरक्षा में और सुधार होगा।





