भारत बना दुनिया का ‘स्नेक अटैक कैपिटल’: हर साल 1.3 मिलियन लोग हो रहे सांप के हमले का शिकार, अध्ययन में चौंकाने वाला खुलासा
वैश्विक रिपोर्ट में भारत शीर्ष पर; स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया बड़ा सार्वजनिक संकट, एंटी-वेनम और त्वरित इलाज की आवश्यकता पर दिया जोर

नई दिल्ली | 28 सितंबर 2026: दुनियाभर में सांप के काटने (Snakebite) की घटनाओं को लेकर हुए एक व्यापक अध्ययन में भारत को लेकर बेहद चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब दुनिया की ‘स्नेक अटैक कैपिटल’ (Snake Attack Capital) के रूप में उभरकर सामने आया है, जहाँ हर साल अनुमानित 1.3 मिलियन (13 लाख) लोग सांपों के काटने का शिकार होते हैं।

अध्ययन की मुख्य बातें
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विशाल आंकड़ा: अध्ययन में पाया गया है कि भारत में सांप के हमलों और डंसने के मामलों की संख्या पूरी दुनिया में सबसे अधिक है।
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वैश्विक तुलना: भारत के बाद दूसरे स्थान पर नाइजीरिया है, जहां सालाना लगभग 1,98,000 से 6,66,000 मामले दर्ज किए जाते हैं। भारत का आंकड़ा अन्य सभी प्रभावित देशों से कहीं अधिक है।
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मुख्य कारण: शोधकर्ताओं के अनुसार ग्रामीण आबादी का कृषि क्षेत्रों में अधिक होना, उचित सुरक्षा साधनों (जैसे जूते) की कमी और स्वास्थ्य सुविधाओं तक तुरंत पहुंच न होना इसके प्रमुख कारण हैं।
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संभावित आंकड़े अधिक: शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि 13 लाख का यह आंकड़ा भी अनुमानित है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई मामले दर्ज ही नहीं हो पाते, जिससे वास्तविक संख्या और भी अधिक हो सकती है।

स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती
रिपोर्ट में कहा गया है कि सांप का डसना केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट है। हालांकि हर मामले में मौत नहीं होती, फिर भी विषैले सांपों के काटने से हजारों लोग अपनी जान गंवा देते हैं या फिर आजीवन विकलांगता का शिकार हो जाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस वैश्विक रिपोर्ट के बाद भारत में एंटी-वेनम (Anti-venom) की उपलब्धता बढ़ाने, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को मजबूत करने और ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाने की सख्त जरूरत है।




