फीफा वर्ल्ड कप ओपनिंग सेरेमनी में नोरा फतेही की प्रस्तुति पर कनाडा में विवाद: एक महिला का वीडियो वायरल
टोरंटो में आयोजित समारोह पर कनाडाई महिला ने उठाए सवाल, कहा— "हम भारतीय नहीं हैं, यह कनाडा है"; सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

टोरंटो: फीफा वर्ल्ड कप 2026 की शुरुआत के साथ ही विवादों का एक सिलसिला भी शुरू हो गया है। कनाडा के टोरंटो में आयोजित फीफा वर्ल्ड कप की ओपनिंग सेरेमनी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक कनाडाई महिला समारोह में बॉलीवुड अभिनेत्री नोरा फतेही के प्रदर्शन पर नाराजगी जाहिर करती हुई दिखाई दे रही है।
क्या है पूरा मामला?
फीफा वर्ल्ड कप 2026 इस बार तीन देशों—मेक्सिको, कनाडा और अमेरिका—में संयुक्त रूप से आयोजित किया जा रहा है। 12 जून को टोरंटो के बीएमओ फील्ड (BMO Field) में आयोजित उद्घाटन समारोह में बॉलीवुड अभिनेत्री नोरा फतेही ने डीजे संजॉय और फ्रांसीसी गायक वेजड्रीम के साथ अपने मशहूर ट्रैक ‘सीर-सीर’ (SIIR SIIR) पर प्रस्तुति दी थी।
इस दौरान एक वीडियो सामने आया है जिसमें एक महिला ने इस प्रदर्शन की तीखी आलोचना की। महिला ने वीडियो में कहा, “क्या कोई मुझे समझा सकता है कि यह कनाडा का ओपनिंग सेरेमनी कैसे है? पिछली बार जब मैंने चेक किया था, तो हम कनाडाई हैं, हम भारतीय नहीं हैं। यह अंग्रेजी नहीं है, हम पंजाबी नहीं बोलते। हम भारतीय नहीं हैं। यह कनाडा है।”
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं
महिला का यह वीडियो सामने आते ही इंटरनेट पर बहस छिड़ गई। कई नेटिज़न्स ने महिला को जानकारी देते हुए बताया कि नोरा फतेही भारतीय नहीं हैं, बल्कि उनका जन्म टोरंटो में हुआ है और वे मोरक्कन मूल की हैं, जिन्होंने बाद में भारतीय मनोरंजन उद्योग में अपना नाम बनाया। सोशल मीडिया यूजर्स ने महिला की टिप्पणी को गलत और अज्ञानतापूर्ण बताया है।
समारोह की पृष्ठभूमि
फीफा 2026 का उद्घाटन समारोह तीन अलग-अलग देशों में आयोजित किया गया था:
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मेक्सिको सिटी: एस्टाडियो एज़्टेका में शकीरा और बर्ना बॉय जैसे कलाकारों ने प्रस्तुति दी।
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टोरंटो: बीएमओ फील्ड में ‘सांस्कृतिक मोज़ेक’ थीम के तहत एलेसिया कारा, माइकल बुबले, नोरा फतेही और वेजड्रीम शामिल हुए।
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लॉस एंजिल्स: सोफी स्टेडियम में केटी पेरी, लिसा (ब्लैकपिंक), अनिता और रेमा जैसे कलाकारों ने समा बांधा।
कनाडा में बढ़ता तनाव
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब कनाडा में आव्रजन (immigration), राष्ट्रीय पहचान और दक्षिण एशियाई मूल के लोगों के प्रति बढ़ते भेदभाव को लेकर पहले ही बहस चल रही है। हाल के महीनों में, भारतीय मूल के लोगों और श्रमिकों के प्रति सार्वजनिक स्थानों पर मौखिक दुर्व्यवहार और नस्लीय टिप्पणियों की खबरें सामने आई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के वायरल वीडियो समाज में मौजूद ध्रुवीकरण और बढ़ती असहिष्णुता को दर्शाते हैं, जो एक बहुसांस्कृतिक देश के रूप में कनाडा की छवि के लिए चिंता का विषय है।
इस पूरे प्रकरण पर आपकी क्या राय है? क्या आपको लगता है कि किसी सांस्कृतिक कार्यक्रम में विदेशी कलाकारों की प्रस्तुति पर इस तरह की प्रतिक्रिया उचित है?




